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hasrat
हसरत हसरत ही रही हमारी की हम रूठे ऑर वो मनाए चाहते रहे हरदम की वो सोए ऑर हम जगाएँ पर आफ़सोस! मेरे रूठने से पहले रूठ जाते हैं वो ऑर जागने से पहले चले जाते हैं वो सोचते रहे दिनभरकी वो आएँ तो गुस्सा दिखाएँ पर आफ़सोस! वो तो आए हीं नही हसरत ही रही हमारी की हम रूठे ऑर वो मनाएँ मेरे सुबकने के पहले फुट पड़े वो मुस्कुराएँ इससे पहले चहक पड़े वो मानते रहे उमर भर की वो भटके ऑर हम रास्ता दिखाएँ पर आफ़सोस ! की वो कभी अकेले चले हीं नही हसरत ही रही हमरी की हम रूठे ऑर वो मनाएँ हसरत ही रही .....हसरत ही रही.....
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