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तुम्हारा ख़त तुम्हारा ख़त
धूप के रेशमी टूकड़े सा
सरक कर आता है
मेरे हृदय की दहलीज तक
जीवन के हर गलियारे को
भर देता है एक उस्मिय आभास से शिथिल हो चली कमनाओं को ताज़ा कर देता है जादुई अहसास से दोनो हाथों से सामेट्ते हुए तुम्हारा प्यार मैं करती हूँ फिर नये ख़त का इंतेज़ार
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